विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड (Foreign Currency Convertible Bonds - FCCB) क्या हैं?

 आज के Global Capital Markets में कंपनियां अपनी पूंजी जुटाने के लिए कई innovative financial instruments का उपयोग करती हैं। इनमें से एक महत्वपूर्ण उपकरण है विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड (FCCB)

अगर आप International Investment और Corporate Finance में रुचि रखते हैं, तो FCCB को समझना आपके लिए जरूरी है।


FCCB क्या है?

FCCB यानी Foreign Currency Convertible Bonds वे बांड होते हैं जो कंपनी द्वारा विदेशी मुद्रा (जैसे अमेरिकी डॉलर, यूरो आदि) में issue किए जाते हैं। ये बांड debt instruments होते हुए भी एक खासियत रखते हैं – इन्हें भविष्य में कंपनी के equity shares में convert किया जा सकता है।

यानि, FCCB एक Convertible debt instrument है जो निवेशकों को fixed interest (coupon) income देता है और एक निश्चित अवधि के बाद उसे equity shares में बदलने का विकल्प भी।


FCCB की मुख्य विशेषताएं:

  • विदेशी मुद्रा में मूल्यांकन: FCCBs को आमतौर पर USD या अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं में issue किया जाता है।

  • Convertible nature: निवेशक एक pre-decided date या अवधि के भीतर FCCB को कंपनी के equity shares में convert कर सकता है।

  • Interest payment: बांड पर मिलने वाला interest foreign currency में ही दिया जाता है।

  • Principal repayment: अगर बांड को equity में convert नहीं किया जाता तो maturity पर principal foreign currency में चुकाना होता है।

  • Currency risk: जब बांड इक्विटी में बदल जाता है, तब dividend भारतीय रुपये में मिलता है, लेकिन रूपांतरण का currency risk निवेशक के पास रहता है।

  • Regulation: FCCB को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत विनियमित किया जाता है।


FCCB क्यों जारी किए जाते हैं?

  • अंतरराष्ट्रीय पूंजी जुटाना: भारतीय या अन्य देशों की कंपनियां विदेशी मुद्रा में capital raise करने के लिए FCCB जारी करती हैं।

  • कम ब्याज दर: क्योंकि FCCB निवेशकों को इक्विटी में conversion का मौका मिलता है, इसलिए इन बांड पर ब्याज दर आमतौर पर सामान्य विदेशी मुद्रा ऋण की तुलना में कम होती है।

  • शेयरधारिता बढ़ाना: FCCB रूपांतरण के माध्यम से कंपनी का equity base बढ़ता है।

  • Currency diversification: कंपनियों को अपनी मुद्रा जोखिम को diversify करने का मौका मिलता है।


FCCB का रूपांतरण (Conversion) कैसे होता है?

FCCB के issue के समय conversion terms तय किए जाते हैं, जिनमें शामिल होते हैं:

  • Conversion period: वह समय सीमा जब बांड को equity shares में बदला जा सकता है।

  • Conversion ratio: प्रति बांड कितने equity shares मिलेंगे।

  • Conversion price: वह मूल्य जिस पर shares आवंटित होंगे, जो आमतौर पर market price से कम होता है।

  • Partial या full conversion: कुछ FCCB पूरी तरह से equity में बदल सकते हैं, जबकि कुछ आंशिक रूप से।


FCCB के लाभ और जोखिम

लाभ:

  • निवेशक को fixed interest के साथ capital appreciation का मौका मिलता है।

  • कंपनियों को foreign currency में सस्ता ऋण मिलता है।

  • इक्विटी में conversion से कंपनी के पास debt कम करने का विकल्प होता है।

जोखिम:

  • Currency risk: exchange rate में बदलाव से निवेशक को नुकसान हो सकता है।

  • Dilution risk: conversion पर existing shareholders की हिस्सेदारी कम हो सकती है।

  • Market risk: बांड के conversion पर शेयर की कीमत कम हो सकती है।


नियामक पहलू (Regulatory Framework)

  • FCCB पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विभिन्न अधिसूचनाएं लागू होती हैं।

  • यह विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA), 1999 के तहत नियंत्रित होते हैं।

  • 1993 में जारी डिपॉजिटरी रसीद तंत्र के तहत भी FCCB और equity shares के निर्गम के लिए दिशानिर्देश तय किए गए हैं।


निष्कर्ष (Conclusion)

विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांड (FCCB) एक अत्यंत उपयोगी वित्तीय उपकरण है जो कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार से पूंजी जुटाने में मदद करता है।
निवेशकों को fixed income के साथ साथ equity में conversion का फायदा भी मिलता है, जिससे यह एक attractive investment option बन जाता है।

हालांकि, इसके साथ currency risk और dilution risk जुड़े होते हैं, इसलिए निवेशक और कंपनी दोनों को सावधानी से निर्णय लेना चाहिए।


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