आज के निवेश के विकल्पों में ऐसे financial instruments की मांग बढ़ रही है जो इक्विटी की potential growth के साथ साथ capital protection भी दें। ऐसी ही एक आधुनिक और दिलचस्प security है इक्विटी लिंक्ड डिबेंचर (ELD)।
अगर आप चाहते हैं कि आपका निवेश equity market से जुड़ा रहे लेकिन साथ ही आपके निवेश की पूंजी सुरक्षित भी रहे, तो ELD आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
ELD की परिभाषा (Definition):
इक्विटी लिंक्ड डिबेंचर (ELD) ऐसे debt instruments होते हैं जिनका interest payment या return directly या indirectly किसी equity asset से linked होता है, जैसे:
निफ्टी 50 (Nifty 50)
एसएंडपी सेंसेक्स (S&P Sensex)
किसी विशेष कंपनी के स्टॉक या
एक कस्टमाइज्ड स्टॉक बास्केट
यानि, ELD में मिलने वाला return fixed interest की बजाय underlying equity asset के प्रदर्शन (performance) पर निर्भर करता है।
ELD कैसे काम करता है?
जब कोई कंपनी ELD issue करती है, तो वह निवेशकों से जो पैसा मिलता है, उसे दो हिस्सों में बाँटती है:
Fixed Income Portion:
एक पूर्व-निर्धारित हिस्सा इस राशि का low-risk fixed income securities में invest किया जाता है, जैसे bonds या debentures, जो निवेश की मूलधन सुरक्षा (capital protection) सुनिश्चित करते हैं।Equity Linked Portion:
बाकी की राशि का उपयोग equity के विकल्प (options) खरीदने में किया जाता है, जो equity asset के returns से जुड़ा होता है। ये options निवेशक को equity market के upside का लाभ लेने का मौका देते हैं।
इस संरचना के कारण, ELD में निवेशकों को अपनी पूंजी पर कुछ हद तक सुरक्षा मिलती है, साथ ही equity से जुड़े लाभांश (returns) का भी मौका मिलता है।
ELD के मुख्य फायदे:
पूंजी सुरक्षा (Capital Protection): निवेश का एक हिस्सा सुरक्षित रहता है, इसलिए मूलधन का नुकसान कम होता है।
इक्विटी से जुड़ा रिटर्न: equity बाजार की संभावित वृद्धि का लाभ मिल सकता है।
फ्लोटिंग रेट (Floating Interest): ELD का ब्याज market के प्रदर्शन पर आधारित होता है, जिससे बेहतर रिटर्न मिल सकते हैं।
कम जोखिम बनाम सीधे equity: सीधे शेयरों की तुलना में जोखिम कम होता है क्योंकि मूलधन का हिस्सा सुरक्षित रहता है।
ELD के जोखिम (Risks):
क्रेडिट रिस्क (Credit Risk): पूंजी सुरक्षा कंपनी की वित्तीय स्थिति पर निर्भर करती है। अगर जारीकर्ता कंपनी डिफॉल्ट करती है, तो निवेशक को नुकसान हो सकता है।
मार्केट रिस्क: equity market के रिटर्न में उतार-चढ़ाव के कारण ब्याज में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
Liquidity Risk: ELD की liquidity सीमित हो सकती है, इसलिए इन्हें तुरंत cash में बदलना कठिन हो सकता है।
रिटर्न की अनिश्चितता: क्योंकि returns equity से जुड़े होते हैं, इसलिए निश्चित ब्याज की तुलना में ये unpredictable होते हैं।
निवेशकों के लिए ELD क्यों महत्वपूर्ण हैं?
ELD उन निवेशकों के लिए एक अच्छा विकल्प हैं जो equity market के growth potential को चाहते हैं लेकिन high risk exposure लेना पसंद नहीं करते। ये instruments financial planning में risk diversification का भी अच्छा माध्यम हैं।
विशेषकर वह निवेशक जो partial capital safety के साथ बेहतर रिटर्न चाहते हैं, उनके लिए ELD उपयुक्त हैं।
समापन (Conclusion):
Equity Linked Debentures (ELD) एक innovative financial instrument है जो debt और equity दोनों की खूबियों को मिलाता है।
यह इक्विटी बाजार के returns का लाभ लेने के साथ-साथ पूंजी सुरक्षा भी प्रदान करता है, हालांकि इसमें issuer credit risk बना रहता है।
अगर आप moderate risk के साथ market linked returns चाहते हैं, तो ELD आपके निवेश पोर्टफोलियो में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अगर आप चाहते हैं, तो मैं आपको ELD के मुकाबले अन्य structured products जैसे Convertible Debentures या Equity Linked Savings Schemes (ELSS) पर भी जानकारी दे सकता हूँ।
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