**सही उत्तर: ✅ Winner’s Curse (विजेता का अभिशाप)**
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### विस्तार से हिंदी में समझिए:
**Winner’s Curse** एक महत्वपूर्ण **Behavioral Bias (व्यवहारगत पूर्वाग्रह)** है।
इसका मतलब है:
> जब कोई निवेशक किसी सौदे, नीलामी (auction) या निवेश अवसर को “जीत” लेता है, तो उसे मनोवैज्ञानिक रूप से लगता है कि उसने बहुत अच्छा किया है, लेकिन **वास्तविक वित्तीय दृष्टि से वह नुकसान में होता है**।
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### ऐसा क्यों होता है?
* निवेशक **बहुत ज्यादा कीमत (Overpay)** कर देता है
* “जीतने” की खुशी में वह **वास्तविक मूल्य (Intrinsic Value)** को नजरअंदाज कर देता है
* प्रतिस्पर्धा या भावनाओं की वजह से **तर्कसंगत सोच खत्म हो जाती है**
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### आसान उदाहरण:
मान लीजिए:
* किसी शेयर का वास्तविक मूल्य ₹100 है
* कई निवेशक उस शेयर के लिए बोली (bidding) लगा रहे हैं
* एक निवेशक ₹130 में शेयर खरीद लेता है
➡️ **व्यवहारिक रूप से**:
उसे लगता है – *“मैं जीत गया, शेयर मिल गया!”*
➡️ **वित्तीय रूप से**:
उसने ₹30 ज़्यादा चुका दिया → **नुकसान**
यही है **Winner’s Curse**।
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### अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?
❌ **Ownership Bias**
– अपने पास मौजूद संपत्ति को जरूरत से ज्यादा मूल्यवान मानना
❌ **Anchoring**
– किसी पुराने दाम या जानकारी से चिपक जाना
❌ **Gambler’s Fallacy**
– यह मानना कि पिछली घटनाओं से भविष्य बदल जाएगा (जैसे लगातार हार के बाद जीत तय है)
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### परीक्षा के लिए याद रखने की ट्रिक 🧠
**“नीलामी जीती, लेकिन कीमत ज्यादा दे दी → Winner’s Curse”**
यह सवाल **NISM, CFA और Behavioral Finance** में बहुत बार पूछा जाता है।