❌ **सही उत्तर: FALSE (गलत)**
### 📊 कारण (संक्षेप में समझें):
जब **ब्याज दरें (Interest Rates) ऊँची** होती हैं, तब:
* उधारकर्ताओं (borrowers) की **EMI / ब्याज भुगतान बढ़ जाता है**
* कंपनियों और व्यक्तियों पर **वित्तीय दबाव** बढ़ता है
* कई उधारकर्ता **समय पर भुगतान नहीं कर पाते**
* इससे **डिफॉल्ट** बढ़ता है और **NPAs (Non-Performing Assets)** बढ़ने की संभावना होती है
### 🧠 सही समझ:
* **High interest rates → Repayment pressure ↑ → Defaults ↑ → NPAs ↑**
* **Low interest rates → Repayment आसान → NPAs कम होने की संभावना**
👉 इसलिए यह कथन कि *“High interest rates पर NPAs कम होते हैं”* **गलत** है।
✅ **अतः उत्तर: FALSE (गलत)**
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